अगर आपको भी लगता है कि बच्चे के कमरे में एक कुर्सी-मेज डालने से उसका मन पढ़ने में लगने लगेगा तो आप गलत है। जी हां, पढ़ाई में बच्चे का फोकस बनाए रखने के लिए साइंस इमोशनल कंफर्ट और रोजमर्रा की आदतों जैसी कुछ और चीजों को भी जरूरी मानता है। बच्चे को पढ़ाई के लिए शांतिपूर्ण माहौल का मिलना, उसे मिलने वाले सबसे अच्छे उपहारों में से एक है। आइए जानते हैं बच्चे का मन पढ़ाई से भटकाने वाली चीजों से कैसे दूर रखें।
पढ़ाई की टेबल दीवार के किनारे नहीं लगी होनी चाहिए
इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे की पढ़ाई की टेबल कभी भी दीवार किनारे सटकर नहीं लगी होनी चाहिए। ऐसा होने पर बच्चा हमेशा खुद को परिवार से अलग-थलग महसूस कर सकता है। आप बच्चे की टेबल को खिड़की के पास अच्छी रोशनी वाली शांत जगह पर लगाएं। जिससे उसकी एकाग्रता में स्वाभाविक रूप से सुधार हो सकता है।
नियम नहीं, कहानी से अव्यवस्था को दूर करें
बच्चे को सिर्फ डेस्क साफ करो, कहने से उसकी टेबल हमेशा साफ नहीं रहेगी। लेकिन ऐसा बच्चे से करवाने के लिए हर चीज के पीछे एक कहानी बुनना जादू की तरह काम कर सकता है। इसके लिए आप पेंसिल बॉक्स को ‘टूल किट’ या लैंप को ‘सोचने वाली रोशनी’ के नाम से बुला सकते हैं। आपके ऐसा करने से बच्चे का अपनी डेस्क पर रखी चीजों से भावनात्मक जुड़ाव बनता है और उन्हें व्यवस्थित रखना उसके लिए ज्यादा आसान हो जाता है। जिससे उसका ध्यान कम भटकता है।
समय और रोशनी का एकसाथ यूज करें
रोशनी और समय एक साथ होने पर शरीर की घड़ी अच्छी तरह काम करती है। सुबह देर से और शाम के शुरुआती घंटों में धीमी रोशनी में पढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है।

