सवर्ण आयोग ने सरकारी नौकरियों में अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षित सीटों पर पुरुषों की आयु-सीमा 37 साल से बढ़ाकर 40 साल करने की सिफारिश की है। क्योंकि, अधिकतम उम्र सीमा का लाभ इस वर्ग को नहीं मिल पा रहा है। जबकि, बाकी समुदायों की आरक्षित सीटों पर नौकरी के लिए यही व्यवस्था है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के तहत बिहार में महिलाओं के लिए अधिकतम आयु-सीमा 40 साल ही है। आयोग ने पुरुषों की आयु-सीमा भी इसी के बराबर करने के लिए कहा है।
जानकारी के अनुसार, सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के लिए हर जिले में 100-100 बेड के छात्रावास की योजना तैयार की गई है। इन छात्रावासों में किसी भी प्रतियोगिता की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके युवक-युवतियों को प्रवेश मिलेगा। उन्हें मुख्य परीक्षा में सफल होने को लेकर कोचिंग दी जाएगी। अगर वे मुख्य परीक्षा में सफल नहीं भी हो पाते हैं तब भी 2 साल तक छात्रावास में रहने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान उन्हें किसी खास रोजगार या नौकरी के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आयोग ने इस संबंध में भी अपनी अनुशंसा की है।
राज्य के उच्च जाति को स्वरोजगार के लिए आगे आने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए उच्च जाति वित्त निगम की स्थापना की अनुशंसा की गई है। इसके तहत उच्च जातियों के लोगों के कारोबार के लिए उनके परियोजना प्रस्ताव के गुण-दोष को देखकर वित्तीय सुविधा दिए जाने पर निर्णय लिया जा सकता है।
उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग, बिहार के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग ने उच्च जाति के गरीबों के हित में कई महत्वपूर्ण अनुशंसाएं व प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजी है। आयोग ने सर्वसम्मति से इसे अमल में लाए जाने को आवश्यक बताया है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

