यूपी में प्रॉपर्टी खरीदने का बहुत बढ़िया मौका आने वाला है। योगी सरकार ने विकास प्राधिकरण और आवास विकास प्राधिकरण में सालों से अनिस्तारित पड़ी पुरानी संपत्तियों को 25 प्रतिशत दर कम कर बेचने की सुविधा दे दी है। प्रदेश में ऐसी करीब 22350 संपत्तियां हैं। इसके साथ नई योजनाओं के लिए संपत्तियों को बेचने के लिए मूल्य तय करने की प्रक्रिया निर्धारित कर दी गई है। पार्क फेस, कार्नर और 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के किनारे भूमि पर लगाने वाला अतिरिक्त चार्ज घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आदर्श कास्टिंग गाइड लाईंस (मूलभूत सिद्धांत) 2025 को मंजूरी दी गई। फैसले के मुताबिक विकास प्राधिकरणों की परिसंपत्तियों के मूल्य निर्धारण के लिए 12 से 15 प्रतिशत तक ब्याज, 15 प्रतिशत तक कंटीजेंटी तथा 10 से 15 प्रतिशत ओवर हेड चार्ज जोड़ा जाता है। अनिस्तारित संपत्तियों में साल दर साल ब्याज में वृद्धि के कारण इसका मूल्य अधिक हो जाता है और इसके खरीददार नहीं मिलते हैं। इसके चलते मौजूदा समय 22350 संपत्तियां अनिस्तारित हैं। इससे एक तरफ लोगों को सस्ती दरों पर आवासीय सुविधा नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसके न बिकने से विकास प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इसीलिए अनिस्तारित संपत्तियों को सेल पर बेचने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। सेल पर इन संपत्तियों को बेचने के लिए संपत्तियों पर 25 प्रतिशत तक छूट देने की व्यवस्था दी गई है। इस छूट के बाद संपत्ति का मूल्य संशोधित मूल्य पहली बार तय मूल्य से कम नहीं होगी। सेल की संपत्तियों का पूरा भुगतान 45 दिन में करने पर छह प्रतिशत, 60 दिन में करने पर पांच प्रतिशत और 90 दिन में जमा करने पर चार प्रतिशत की छूट मिलेगी।
इसके साथ ही प्राधिकरण की नई संपत्तियों की कीमत भूमि की लागत, आंतरिक विकास लागत, वाह्य विकास लागत, भवन विकास लागत और ब्याज स्टेट बैंक के एमसीएलआर से एक प्रतिशत अधिक के आधार पर तय किया जाएगा। अभी मनमाने तरीके से ब्याज विकास प्राधिकरणों द्वारा लिया जा रहा था, जिससे भूमि की कीमत अधिक हो जा रही है। कार्नर चार्ज, पार्क फेसिंग चार्ज और 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क वाली संपत्तियों पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा। इनमें से तीनों स्थितियां एक साथ होने पर यह चार्ज मात्र 12 प्रतिशत ही लिया जाएगा। कमजोर वर्गों और अन्य छोटी श्रेणी के मकान या प्लाट पर अभी तक 10 प्रतिशत पर किस्त ली जा रही है, इसमें दो प्रतिशत की कमी करते हुए आठ प्रतिशत कर दिया गया है।

