केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने प्रदेश के तीन प्रमुख औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्रों के लिए आगामी 23 वर्षों के परिवहन ढांचे का खाका खींचना शुरू कर दिया है। इसके तहत इन शहरों में लॉन्ग-टर्म मेट्रो डेवलपमेंट प्लान (2025-2047) तैयार करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने न सिर्फ इसकी मंजूरी दे दी है बल्कि इन शहरों में मेट्रो का जाल बिछाने के लिए अनापत्ति (एनओसी)भी जारी कर दी है। यह तीन शहर लखनऊ, कानपुर और आगरा हैं।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण, कानपुर विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद से सहयोग मांगा गया है। उन्होंने लिखा है कि मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार केवल वर्तमान जरूरतों को देखकर नहीं, बल्कि वर्ष 2047 की आबादी और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके लिए इन सभी प्राधिकरणों से उनके आगामी ‘मास्टर प्लान’ और भविष्य की संभावित परियोजनाओं की सूची तत्काल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उद्देश्य यह है कि मेट्रो के भविष्य के रूट और स्टेशन उन क्षेत्रों को जोड़ें जहां आने वाले वर्षों में नए आवासीय और व्यावसायिक केंद्र विकसित होने वाले हैं।
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने अपनी सहमति प्रदान कर दी है। मंत्रालय द्वारा इस परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। अब यूपीएमआरसी वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर रहा है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि मेट्रो के अलावा अन्य कौन से मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम इन शहरों के लिए बेहतर होंगे।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्लानिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इस ‘लॉन्ग-टर्म डेवलपमेंट प्लान’ से शहरी विकास को व्यवस्थित दिशा मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि मेट्रो के रूट और शहरों का विकास अलग-अलग दिशाओं में होता है, जिससे लोगों को स्टेशन तक पहुंचने में असुविधा होती है। विकास प्राधिकरणों के साथ इस तालमेल से मेट्रो सीधे उन इलाकों तक पहुंचेगी जहां भविष्य में लोग बसेंगे। सरकार के इस विज़न डॉक्यूमेंट का लक्ष्य न केवल यातायात को सुगम बनाना है, बल्कि इन शहरों की अर्थव्यवस्था को भी गति देना है।
तीन शहरों पर केंद्रित : लखनऊ, कानपुर और आगरा के मेट्रो कॉरिडोर का व्यापक विस्तार
-दीर्घकालिक लक्ष्य : वर्ष 2024 से 2047 तक की शहरी परिवहन आवश्यकताओं का रोड मैप
-एकीकृत विकास : विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान के साथ मेट्रो रूट का समन्वय
-आधुनिक तकनीक : भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अत्याधुनिक मेट्रो और ट्रांजिट प्रणालियों का विकास

