चांदी की कीमतों में सोमवार को भारी उतार-चढ़ाव आया। वायदा कारोबार में सुबह इसके दाम 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए, लेकिन दोपहर बाद जोरदार मुनाफावसूली होने से इसमें 24,474 रुपये की तेज गिरावट आई। इसके साथ ही चांदी 2,29,700 के निचले स्तर पर पहुंच गई।
यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। हालांकि, वायदा करोबार में आई इस गिरावट का असर हाजिर बाजार (सर्राफा बाजार) पर फिलहाल नहीं पड़ा। व्यापारियों की लगातार खरीदारी के कारण राष्ट्रीय राजधानी में चांदी 3,650 रुपये बढ़कर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। शुक्रवार को चांदी 2,36,350 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेज गिरावट का असर स्थानीय वायदा कारोबार पर आने वाले दिनों में दिख सकता है। इस साल चांदी की हाजिर कीमतों में अब तक 1,50,300 रुपये का तेज उछाल आ चुका है और इसका मुनाफा करीब 170 फीसदी तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, चांदी का मार्च 2026 का अनुबंध अपने रिकॉर्ड स्तरों से तेजी से गिरा। कॉमेक्स में चांदी 3.49 डॉलर यानी 4.51 प्रतिशत गिरकर 73.71 डॉलर प्रति औंस रह गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड 82.67 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची थी।
इस गिरावट की प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज द्वारा प्रति अनुबंध का शुल्क 20 हजार डॉलर से बढ़ाकर 25 हजार डॉलर करना भी रहा। इसकी वजह से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उत्पादक देश चीन 1 जनवरी 2026 से इसके निर्यात पर सख्ती करने की तैयारी में है। चीन की सरकार निर्यात लाइसेंस को लेकर नियम लागू कर सकती है, जिससे चांदी का निर्यात सीमित हो सकता है। ऐसे में दुनियाभर में चांदी की किल्लत हो सकती है, जिससे इसकी कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी उद्योगपति और इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने चांदी की कीमतों पर चिंता. जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह अच्छा नहीं है। कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में चांदी की आवश्यकता होती है।

