2025 का साल खत्म चुका है। पिछला साल भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। 2025 के अंत से पहले भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त कर लिया है। भारत की नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं। अब सवाल ये है कि जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरा स्थान हासिल करने में कितना समय लगेगा? आइए समझते हैं – क्या है जीडीपी, भारत ने जापान को कैसे पीछे छोड़ा, और जर्मनी से आगे निकलने की राह कैसी है।
जीडीपी यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट- ये एक देश में एक साल में बने सभी सामान और सेवाओं की कुल कीमत होती है। इसे दो तरीके से देखते हैं: रियल जीडीपी: महंगाई को हटाकर असली बढ़ोतरी।
नॉमिनल जीडीपी: मौजूदा कीमतों और डॉलर में गिना जाता है। दुनिया की रैंकिंग इसी से तय होती है, क्योंकि इसमें मुद्रा का उतार-चढ़ाव भी शामिल होता है।
- हमारी आबादी ज्यादा है और युवा लोग ज्यादा काम कर रहे हैं।
- घरेलू खपत (लोगों का खर्च) मजबूत है।
- सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इकोनॉमी पर जोर दे रही है।
जापान लंबे समय से दुनिया की तीसरी या चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन पिछले कुछ सालों में उसकी बढ़ोतरी बहुत धीमी हो गई है- सिर्फ 1-2% सालाना।
- बुजुर्ग आबादी ज्यादा, युवा कम (लेबर की कमी)।
- महंगाई कम, लेकिन अर्थव्यवस्था रुकी हुई सी।
भारत की ग्रोथ रेट 6-8% रही है। 2025 में भारत की नॉमिनल जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि जापान की करीब 4.1 ट्रिलियन के आसपास रुकी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, ये ओवरटेक 2025 में ही हो गया। कुछ पुराने अनुमान 2026 कहते थे, लेकिन ताजा डेटा से साफ है कि भारत अब चौथे नंबर पर है।
सरकारी रिपोर्ट ‘2025: ए डिफाइनिंग ईयर फॉर इंडिया ग्रोथ’ में कहा गया है कि मौजूदा गति बनी रही तो भारत अगले ढाई से तीन साल में जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि 2026 में तब होगी, जब अंतिम वार्षिक GDP आंकड़े जारी किए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के अनुसार, 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 4.51 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि जापान की GDP 4.46 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
वर्तमान में जर्मनी की जीडीपी करीब 4.7-5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है (2025 के अंत में)। भारत अभी 4.18 ट्रिलियन पर है, यानी करीब 0.5-0.8 ट्रिलियन का फर्क है।
- भारत: रियल ग्रोथ 6.5-7.3% (2025-26 में), नॉमिनल ग्रोथ (महंगाई मिलाकर) 9-11% के आसपास। मतलब हर साल जीडीपी में 400-500 बिलियन डॉलर का इजाफा।
- जर्मनी: रियल ग्रोथ सिर्फ 0-1.5% (2025 में कुछ जगहों पर जीरो या नेगेटिव भी अनुमानित), नॉमिनल ग्रोथ 2-3%। वजहें – यूरोप में ट्रेड वॉर, एनर्जी क्राइसिस, और कमजोर एक्सपोर्ट।
सरकार और कई एक्सपर्ट्स (IMF, वर्ल्ड बैंक, मूडीज) के अनुमान से:
- भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा।
- इसी दौरान भारत जर्मनी को पीछे छोड़ देगा- अगले 2.5 से 3 साल में, यानी 2028 या 2029 तक।
कुछ अनुमानों में तो इससे भी पहले की बात कही गई है यानी 2027-2028, लेकिन मौजूदा ट्रेंड से 2028-2030 सुरक्षित साल लग रहा है। अगर भारत की ग्रोथ 6-7% बनी रही और रुपया ज्यादा नहीं गिरा, तो ये जल्दी भी हो सकता है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूती
सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब वैश्विक व्यापार माहौल अनिश्चित बना हुआ है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर भारी टैरिफ लगाए थे। इसके बावजूद सरकार ने कहा कि भारत की निरंतर आर्थिक वृद्धि वैश्विक चुनौतियों के बीच उसकी आर्थिक मजबूती और लचीलापन दर्शाती है। गौरतलब है कि भारत 2022 में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था, जब उसने अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक ब्रिटेन को पीछे छोड़ा था।
जनसंख्या में नंबर-1, लेकिन प्रति व्यक्ति आय अभी चुनौती
जनसंख्या के लिहाज से भारत 2023 में चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विश्व बैंक के अनुसार, 2024 में भारत की GDP प्रति व्यक्ति आय 2,694 डॉलर रही, जो जापान की तुलना में करीब 12 गुना और जर्मनी से लगभग 20 गुना कम है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की 1.4 अरब आबादी में से 25 प्रतिशत से अधिक युवा 10 से 26 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। ऐसे में, देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है- लाखों युवाओं के लिए अच्छी और स्थायी नौकरियां पैदा करना।

