एकीकृत युद्धक समूहों (आईबीजी) के गठन से ऊंचे इलाकों में सेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा। ये युद्धक समूह 12 घंटे के भीतर सटीक हमले को अंजाम देने में सफल होंगे। मौजूदा समय में सेना के एक डिवीजन को हमले के लिए तैयार करने में करीब दो दिन का समय लग जाता है। चीन सीमा पर तैनात माउंटेन स्ट्राइक कार्प को तोड़कर सबसे पहले आईबीजी में बदला जाएगा।
सेना के सूत्रों ने कहा कि सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद अब जल्द आईबीजी के गठन की प्रक्रिया आरंभ होगी। लक्ष्य यह है कि अगले दो सालों में माउंटेन कार्प को आईबीजी में तब्दील कर चीन से मिलने वाली रक्षा चुनौती का ठोस समाधान सुनिश्चित किया जाए।
भारतीय सेनाएं इस समय एकीकरण की तैयारियों में जुटी हुई हैं। सेना के सूत्रों ने कहा कि यह प्रक्रिया नीचे से शुरू की जा रही है। पहले भैरव बटालिन, उसके बाद रुद्र ब्रिगेड का गठन और अब आईबीजी का निर्माण एकीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा है। मौजूदा एकीकरण एक सेना के भीतर है, आने वाले दिनों में तीनों सेनाओं का भी एकीकरण होना है।
आईबीजी सेना का अब तक का सबसे तीव्र कार्रवाई करने वाला पहला घातक समूह होगा। इसमें करीब 4500-5000 सैनिक होंगे। इसका आकार ब्रिगेड से बड़ा होगा, जिसमें 3000-3500 सैनिक होते हैं। यह डिवीजन से छोटा होगा, जिसमें 10-12 हजार सैनिक होते हैं। आईबीजी में पैदल सेना (इंफेंट्री), तोप दस्ता, आर्मर्ड (सशस्त्र वाहन), इंजीनियर्स, सिग्नल्स, एयर डिफेंस की हिस्सेदारी होगी। बाद में जब थियेटर कमान बनेगी तो इसके पास एयरफोर्स की ताकत भी आ जाएगी।
सेना के सूत्रों ने कहा कि आईबीजी को ऊंचे इलाकों में युद्ध के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। आईबीजी के गठन की सोच पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की थी। उनके कार्यकाल में अरुणाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में ऐसे समूह का परीक्षण भी किया गया था लेकिन इस परियोजना को मंजूरी मिलने में कई साल का विलंब हुआ है।

