इस साल का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन की अमावस्या के दिन लग रहा है। साल का पहला ग्रहण बेहद ही अद्भुत माना जा रहा है। न केवल ये शनि की कुंभ राशि में मंगलवार को लगने जा रहा है, बल्कि आग के छल्ले जैसा नजारा भी आसमान में देखा जा सकेगा। आपके भी मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि साल के पहले सूर्य ग्रहण का प्रभाव कैसा रहने वाला है। अलग-अलग देशों में ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा। कहीं पर ग्रहण दिखाई देगा तोकहीं पर सूतक का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं भारत में ग्रहण का प्रभाव, समय, कब और क्यों लगेगा साथ ही किसके लिए शुभ होगा-
ज्योतिषाचार्य पं. ह्रदय रंजन शर्मा के अनुसार, ग्रहण को लेकर लोगों में भ्रांति बनी हुई है। भारत में इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है। ज्योतिष के हिसाब से ये ग्रहण बेहद खास है, क्योंकि इस दौरान सूर्य कुंभ राशि में राहु के साथ युति में रहेंगे। 64 साल बाद ऐसा योग बन रहा है। आखिरी बार 1962 में ऐसा हुआ था। इस बार भी सूर्य और राहु कुंभ में और चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। ये योग ग्रहण के प्रभाव को और गहरा बना देता है।
दुर्गा सप्तशती के अनुसार, जब अमावस्या मंगलवार को हो और चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में, तब ये संयोग कला, लेखन, साधना और अध्यात्म के लिए काफी शुभ माना जाता है।
सूर्य ग्रहण ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 32 मिनट की अवधि का होगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर में लगभग 03:20 मिनट पर स्पर्श होगा, शाम 05:03 पर मध्यकाल और 06:47 पर इसका मोक्ष होगा।
साल का पहला सूर्य ग्रहण दक्षिण अर्जेंटीना, अफ्रीका और अंटार्कटिका में रिंग ऑफ फायर (अग्नि वलय) के रूप में दिखाई देगा। दक्षिणी अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ शहरों में इसका खास प्रभाव रहेगा। सूरज के करीब 96 प्रतिशत हिस्से को चंद्रमा ढक लेगा और आसमान में एक अद्भुत रिंग ऑफ फायर दिखेगा। यानी सूरज एक आग के छल्ले जैसा नजर आएगा। रिंग ऑफ फायर की यह पूरी घटना करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक दिखेगी।
रिंग ऑफ फायर कहलाने वाले इस अनोखे सूर्य ग्रहण में चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा और आसमान में आग के छल्ले जैसा अद्भुत दृश्य दिखाई देगा। साइंस एंड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय सचिव सह राष्ट्रीय दूरबीन निर्माण कार्यशाला भोपाल के डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव के अनुसार, साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण, जिसे रिंग ऑफ फायर के नाम से जाना जाता है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होकर शाम 5:42 बजे चरम पर पहुंचेगा और रात 7:57 बजे समाप्त होगा।
सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है, जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है। भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण, तब दिखाई देता है, जब चन्द्रमा सूर्य को पूरी तरह एक साथ नहीं आच्छादित कर पाता। जैसा 20 मई, 2012 के सूर्य ग्रहण में देखा गया। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी की। कभी-कभी चांद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ रोशनी रोक लेता है, जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

