अयोध्या के श्री राम मंदिर में रामनवमी का पर्व 27 मार्च को मनाया जाएगा। चैत्र शुक्ल महाअष्टमी की तिथि 26 मार्च को अपराह्न 2.11 बजे समाप्त होकर 27 मार्च को मध्याह्न 12.02 बजे तक रहेगी। इसके कारण 27 मार्च को ही मध्याह्न 12 बजे रामलला के प्राकट्य की महाआरती उतारी जाएगी। राम मंदिर में विराजित रामलला के ललाट पर मध्याह्न ठीक 12 बजे सूर्य तिलक का आयोजन वैज्ञानिक पद्धति से होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप यहां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से अनुबंधित सीबीआरआई और आप्टिका लिमिटेड बंगलुरु के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को राम मंदिर में लगाए गए उपकरणों का परीक्षण किया। इस अवसर पर रामलला के पंचामृत सहित दिव्य औषधियों से अभिषेक और शृंगार के साथ प्राकट्य की महाआरती और सूर्य तिलक का सजीव प्रसारण भी किया जाएगा। राम मंदिर परिसर में पांच दर्जन से अधिक स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गयी है। इसके अलावा दूरदर्शन पर भी सीधा प्रसारण होगा जिसे श्रद्धालु गण अपने -अपने घरों पर भी देख सकेंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से रामनवमी पर रामलला और उनके अनुजों सहित माता सीता के लिए विशेष परिधान भेजे गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा अनिल मिश्र ने भेजे गए परिधान के साथ प्रसाद रामलला को समर्पित कराया। उन्होंने सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत भी किया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के कार्यपालक अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि रामनवमी के पर्व पर भगवान को धनिया की पंजीरी का विशेष भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद का निर्माण कराने के लिए वह कारीगरों को लेकर आए थे। उन्हीं कारीगरों ने शुद्धता के साथ 11 मन यानि साढ़े चार कुंतल पंजीरी तैयार किया है। रामलला के भोग के बाद पैकेट बनाकर यह प्रसाद श्रद्धालुओं में रामनवमी को वितरित किया जाएगा। इस प्रसाद के साथ मथुरा के प्रसिद्ध मिष्ठान, फल व अन्य सामग्रियां भेंट की गयी हैं।
मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव का कहना है कि रामनवमी मेला शुरू हो चुका है और प्रतिदिन एक लाख के करीब श्रद्धालु रामलला का दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवमी के पर्व पर यह भीड़ बढ़ेगी। इसके कारण सुविधाओं को भी बढ़ाया जा रहा है। इनमें सभी को दर्शन सुलभ कराने के लिए दर्शन अवधि में बढ़ोत्तरी की गई है। इसके साथ आठ लेन में सभी को दर्शन कराया जाएगा। श्रद्धालुओं को पीने के लिए स्वच्छ पानी और धूप से बचाने के लिए अस्थाई टेंट लगाए गए हैं।
पुरातन काल से रामनगरी में चैत्र रामनवमी मेले का आयोजन होता रहा है और हर मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी उमड़ती रही। मेले में आने वाले ज्यादातर लोग राम के जन्मोत्सव का साक्षी होने को लालायित रहते हैं,जिसके चलते कनक भवन में भारी भीड़ उमड़ती है। अब राम जन्मोत्सव राममंदिर परिसर में भी आयोजित होने लगा है, लेकिन इसमें शामिल होने वालों की तादात सीमित होती है। इस बार भी राममंदिर के गर्भगृह में भव्यता के साथ जन्मोत्सव मनाये जाने की तैयारी है। रामलला के दर्शन-पूजन के लिए रोजाना अच्छी खासी भीड़ आ रही है और मेले के मुख्य पर्व पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने के उम्मीद जताई जा रही है।

