श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय द्वारा पत्र जारी किए जाने से ट्रस्ट में खलबली मची है। नए और पुराने पदाधिकारियों के बीच मेल-मुलाकात और बैठकों का दौर तेज हो गया है। पदाधिकारी पत्र से हुए नुकसान की भरपाई में जुट गए हैं। तीर्थ क्षेत्र भवन में निवास कर रहे चंपत राय से मुलाकात करने के लिए ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी पहुंचे। इसके कुछ घंटे बाद प्रसिद्ध साहित्यकार और लेखक यतीन्द्र मोहन मिश्र, बड़ा भक्तमाल के पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण, श्री रामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य गोपाल राव कोषाध्यक्ष से मिलने के लिए पहुंचे। प्रमुख साधु-संत और पूर्व सदस्य की बातचीत लगभग एक घंटे से अधिक तक चली। बाहर निकलने के बाद महंतों ने एक लाइन में बताया कि जल्द कुछ बड़ा होने वाला है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच आपस में ही दूरियां बढ़ गई हैं। इस बात के संकेत मिलने लगे हैं। महासचिव पद से चंपत राय को निकाले जाने के बाद से वह काफी नाराज हैं। उन्हें लगता है कि बुरे समय में उनका साथ सभी ने छोड़ दिया है। मंगलवार को पत्र जारी करने के साथ उन्होंने रामायण का श्लोक लिखकर इस बात को समाज में सार्वजनिक भी किया। पत्र के माध्यम से उन्होंने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की है। अब दूसरा पत्र उनके द्वारा जारी न किया जाए इसे रोकने की कवायद शुरू हो गई है। तीर्थ क्षेत्र पुरम में मुलाकात के निहितार्थ इसी रूप में तलाशे जा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि चंपत राय से मंगलवार की देर शाम और बुधवार की सुबह संघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों ने भी फोन पर बात की है और उन्हें कुछ दिन शांत रहने के साथ सब ठीक करने की बात कही है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने वैदेही भवन के बंद कमरे में एक घंटे से अधिक तीन मंदिर के महंतों से बातचीत की है। बाहर निकलने के बाद श्री राम बल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा, आने वाले समय में बड़ा परिवर्तन होगा जिसकी चारों तरफ सराहना होगी। बड़ा भक्तमाल मंदिर के महंत अवधेश दास ने बताया कि राम मंदिर की व्यवस्था कैसे सुधारी जाए इस विषय पर बैठक थी।
जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण ने बताया, कोषाध्यक्ष से कहा गया है कि ट्रस्ट में संतों का भी नेतृत्व रहे इस पर विचार करना जरूरी है। क्योंकि पीढ़ी दर पीढ़ी संतों ने आंदोलन में सहभागिता निभाई है। अभी तक ट्रस्ट द्वारा संतों की जो उपेक्षा हुई है उसी का फल सामने प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया, ट्रस्ट के लोग भी यह मान रहे हैं।
ट्रस्ट की बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। इससे पहले संतों की एक बड़ी बैठक होने की सूचना मिल रही है। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद संतों से संपर्क करने में जुट गया है। बैठक में 500 से अधिक संतों महंतों की सहभागिता दिख सकती है। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी मामले में हिंदू समाज में जो नकारात्मकता फैली है उसे कैसे दूर किया जाए।
संतों-महंतों से आग्रह किया जाएगा कि वह प्रवचन और अन्य माध्यमों से अपने शिष्यों को बताएं कि चोरी मामले में पूरा ट्रस्ट नहीं, कुछ लोग शामिल थे जिन्हें जेल भिजवाया गया। यह सारा कार्य ट्रस्ट द्वारा ही किया गया है क्योंकि पूर्व महासचिव चंपत राय के कहने पर एसआईटी का गठन हुआ और केस भी ट्रस्ट के सदस्य ने ही दर्ज करवाने का काम किया।

