पूजा-पाठ में भगवान को भोग लगाने का विधान शास्त्रों में भी है। बिना भोग लगाए भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। हर देवी-देवता को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं। इससे वो प्रसन्न होते हैं और साधक को आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन जब बात पिज्जा-बर्गर की आती है, तो भगवान को इसका भोग लगाने से लोग कतराते हैं। ऐसे में एक साधक ने वृंदावन के फेमस संत प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि क्या श्रीजी को पिज्जा या बर्गर का भोग लगा सकते हैं? चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया।
इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ईश्वर भक्त का भाव देखते हैं। इसलिए आप उनके लिए घर में सात्विक रूप से इन चीजों को बनाकर भोग लगा सकते हैं। घर और बाजार के खाने में अंतर है। घर में हम शुद्ध घी या तेल से भोजन पकाते हैं लेकिन बाजार में शुद्धता का ध्यान नहीं रखा जाता है, इसलिए बाजार के खाने पर अंकुश रखें। भोग में अपवित्र खाने का कोई स्थान नहीं होता। ऐसे में यदि पिज्जा या बर्गर घर पर बनाया है और शुद्धता के साथ, तो आप इसका भोग भी लगा सकते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि स्वयं भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाना चाहिए। कई घरों में रोजाना जो भोजन पकता है उसका भोग भी ईश्वर को समर्पित किया जाता है उसके बाद ही परिवार वाले भोजन करते हैं।
एक भक्त ने उनसे पूछा कि महाराज जी आपका प्रिय शास्त्र और प्रिय भोजन प्रसाद क्या है? चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने इसका क्या जवाब दिया। महाराज जी कहते हैं कि सबसे प्रिय शास्त्र उड़िया बाबा के उपदेश। वो आगे कहते हैं कि हमारे जीवन के आदर्श भी उड़िया बाबा महाराज जी है। वहीं प्रिय भोजन प्रसाद के बारे में महाराज जी कहते हैं कि जो मिल जाए, वही प्रिय भोजन प्रसाद है। महाराज जी कहते हैं कि वैसे इस शरीर को मीठा बहुत प्रिय था।

