नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से लाखों छात्र-छात्राओं तथा उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को जल्द समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
मायावती ने कहा कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन छात्र आंदोलन अब सड़क से लेकर संसद तक चर्चा और टकराव का विषय बन गया है। उनके अनुसार, इस मुद्दे के राजनीतिकरण से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है, जिससे दिल्ली के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि देशहित में इस गतिरोध को जल्द समाप्त करना आवश्यक है।
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप हों या फिर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं, ये सभी भ्रष्टाचार के बढ़ते दायरे का परिणाम हैं। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार समाज और व्यवस्था को भीतर से कमजोर कर रहा है। मायावती ने संवैधानिक नैतिकता (कॉन्स्टीट्यूशनल मॉरैलिटी) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सुशासन के लिए संवैधानिक नैतिकता को आवश्यक बताया था, लेकिन इसके अभाव में भ्रष्टाचार दीमक की तरह व्यवस्था को खोखला कर रहा है।
उन्होंने सरकार, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे देश और जनहित से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने आंदोलन को राजनीतिक दलों द्वारा अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। मायावती ने कहा कि आंदोलन का राजनीतिकरण, सड़क से संसद तक टकराव और हिंसा किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने अंत में सरकार और आंदोलनकारियों से अपील की कि वे आपसी संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से जल्द से जल्द समाधान निकालें, ताकि छात्रों के हितों की रक्षा हो सके और सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।

