विजय वर्मा, प्रमुख संवाददाता, लखनऊ। नगर निगम की ओर से नालों की सफाई के दावों की पोल मंगलवार सुबह हुई बारिश के बाद खुल गई। शहर के कई इलाकों में नाले जाम होने से सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। सबसे गंभीर स्थिति आशियाना क्षेत्र में रही, जहां किला मोहम्मदी ड्रेन उफनाने से एलडीए कॉलोनी के कई सेक्टर जलमग्न हो गए और करीब 50 हजार की आबादी जलभराव की समस्या से जूझती रही।
आशियाना के सेक्टर एल, सेक्टर एच, सेक्टर जी, एच समेत कई इलाकों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। सबसे खराब हालात सेक्टर एल में देखने को मिले, जहां चारों तरफ पानी भर जाने से पूरा इलाका टापू जैसा नजर आने लगा। सुबह आठ बजे के बाद हालात ऐसे हो गए कि दफ्तर जाने की तैयारी कर चुके लोगों को वापस घर लौटना पड़ा। कई परिवार घंटों तक घरों में कैद रहे।
कानपुर रोड पर मानसरोवर के पास रेलवे लाइन के नीचे से गुजरने वाला किला मोहम्मदी ड्रेन कचरे और गाद से पूरी तरह चोक हो गया है। इसके चलते ड्रेन का पानी निकल नहीं पा रहा था। वापस कॉलोनी की ओर बहने लगा। इसके बाद कुछ ही देर में सड़कों पर पानी भर गया। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई।
सेंट टेरेसा स्कूल सेक्टर एल के आसपास कई कारें पानी में बंद हो गईं। बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक रास्ते में फंस गए। इलेक्ट्रिक स्कूटर चालकों को अपने वाहन धक्का देकर निकालने पड़े। आशियाना खजाना मार्केट से विशाल मेगा मार्ट तक पूरी सड़क पानी से लबालब रही, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।
जलभराव की सूचना मिलते ही नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव और जोनल अधिकारी आशीष कुमार सिंह स्वयं जल निकासी कार्य की निगरानी करते रहे। कुछ इलाकों से अधिकारी पानी निकलवाने में कामयाब हुए लेकिन निचले क्षेत्रों में लगातार पानी भरा हुआ है।
जलभराव का संकट केवल आशियाना तक सीमित नहीं रहा। जानकीपुरम विस्तार में भी नालों की सफाई के दावों की सच्चाई सामने आ गई। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विनय कृष्ण पांडेय पिछले तीन महीनों से लगातार नालों की सफाई की मांग उठा रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
मंगलवार को हुई बारिश के बाद जानकीपुरम विस्तार की कई सड़कें पानी में डूब गईं। विनय कृष्ण पांडेय ने कहा कि यदि समय रहते नालों की सफाई कर दी गई होती तो लोगों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
चिनहट क्षेत्र में भी कई प्रमुख मार्गों और कॉलोनियों में पानी भर गया। वहीं पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। लोगों ने कहा कि हर वर्ष करोड़ों रुपये नालों की सफाई पर खर्च किए गए, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्था की वास्तविकता सामने आ गई।

