जालौन में एसडीएम न्यायिक उरई के पद पर तैनात आईएएस रिंकू सिंह राही ने कहा कि बार-बार सुरक्षा के लिए अनुरोध करने के बाद भी उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही है। रिंकू सिंह राही ने सुरक्षा संबंधी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उधर प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उनकी सुरक्षा बढ़ाने की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रिंकू राही ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि सुरक्षा को खतरा गंभीर बना हुआ है। लगातार अनुरोध करने पर भी शायद जानबूझकर सुरक्षा व्यवस्था नहीं बढ़ाई जा रही है। अभी उपलब्ध सभी प्लेटफॉर्म पर लगातार अनुरोध किया जा रहा है। लेकिन पता नहीं क्यों, किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। अगर “सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत नहीं है” लिखकर दे दें तो कोर्ट की शरण ली जाए, लेकिन वह भी नहीं है। उन्होंने तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि लगातार अनुरोध करने के बाद भी जानबूझकर उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही है, क्या कोई दुर्घटना होने का इंतजार करना चाहिए।
रिंक सिंह राही का कहना है कि मैंने 27 जुलाई को डीजीपी को पत्र लिखकर थ्रेट असेसमेंट करवाकर सुरक्षा उपलब्ध करवाने की मांग की थी। इससे पहले रिंकू राही ने जालौन के पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखा था। सवाल उठाया कि अगर प्रशासन को लगता है कि सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत नहीं है तो यह बात लिखित रूप में बतानी चाहिए, ताकि वह कोर्ट की शरण ले सकें। उन्होंने कहा कि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रतीत होता है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि “Justice For Rinku Singh Rahi” नामक फेसबुक पेज, जिसे उनके समर्थकों द्वारा संचालित बताया गया था, हटा दिया गया है। आशंका जताई कि अन्य सोशल मीडिया आईडी को भी निशाना बनाया जा सकता है। पोस्ट में राही ने आरोप लगाया कि सुरक्षा से जुड़े पत्र सार्वजनिक करने पर उन पर मीडिया में आने की मंशा रखने का आरोप लगाया जाता है।रिंकू सिंह राही ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर कई पोस्ट की। उन्होंने आरोप लगाया और कहा कि जनपद के सीनियर अधिकारी ने कहा कि मुझे होने वाले खतरों के कारण ही जांच हटाई गई हैं। अवैध खनन को रोकने से रोका गया था, आदि.. आदि। जबकि मेरा कहना था कि यदि वास्तव में लगता है कि खतरा था/है, तो कार्य दायित्वों के निर्वहन करने से रोकने के स्थान पर सुरक्षा ही बढ़ा दें।
राही ने सवाल किया कि क्या देश की सरहद (border) पर खड़े सैनिक को जान का खतरा नहीं होता है। क्या उस खतरे को देखकर उनसे कह दिया जाता है कि duty मत करो। वहां पर एकदम खतरा होता है, लेकिन उन्हें ड्यूटी से न हटाकर उनके लिए रक्षोपाय किए जाते हैं, जिससे कि खतरा एकदम न्यून हो जाए।
रिंकू सिंह राही ने कहा कि रास्ते में चलते समय कब दुर्घटना हो जाए, किसी को पता नहीं है, फिर भी तो लोग चलते हैं। इसलिए उनका किसी और मंशा से दिया गया निर्देश और खुद को एकदम सही दिखाने वाले कथन, मुझे मात्र बहाना ढूंढना ही लगे, क्योंकि मेरी सुरक्षा बढ़ाने के लिए, जो उनके पूर्णरूपेण अधिकार क्षेत्र में है, उसकी भी पहले अनुमति देकर भी बाद में अनुमति रोक दी गई है।
राही ने एक और पोस्ट में कहा कि कुछ का कहना है कि IAS बनने के बाद ही मुझे समस्याएं क्यों आने लगीं। जबकि सच यह है कि अब तक की चुनौतियों से बहुत ही ज्यादा गंभीर चुनौतियों का सामना पूर्ववर्ती सेवा (जिला समाज कल्याण अधिकारी) में किया है और हरेक चुनौती से कुछ न कुछ सीखने को मिला, विशेषकर कि इन चुनौतियों का समाधान के क्या विकल्प हो सकते हैं।
अब मीडिया में मेरे कार्यों की चर्चा क्यों होती है। तो इसका उत्तर मेरे पास नहीं है, वैसे भी बहुत से मीडिया में काफी नेगेटिव भी रहता है। इसमें तो बस यह ध्यान आता है “जाकी रही भावना जैसी” इसलिए इन सब पर सोचना भी समय व्यर्थ लगता है। जिसे जितना खोजना है, वे खोज लें। हालांकि कई पहले ऐसी भी रही हैं, जिनकी पुनरावृत्ति होने से आमजन को काफी लाभ मिलेगा। रिंकू राही ने कहा कि वो आमजन के सहयोग से केवल सकारात्मक कार्य ही करना चाहते है. बस हरेक जगह गंदगी होने के कारण यह लगभग सर्वव्याप्त हो चुकी कुव्यवस्था अपने साथ मुझे उलझा ही लेती है।
सदर में वकीलों ने आईएएस रिंकू सिंह राही पर असभ्य बर्ताव करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि रिंकू सिंह राही ने अपनी एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि उन्होंने नियमानुसार काम किया। जिसके बाद से वे चर्चा में हैं। आईएएस से इस्तीफा देने वाले अधिकारी रिंकू सिंह राही का विवादों से पुराना नाता है।
एसपी जालौन विनय कुमार सिंह का कहना है कि तैनाती के पहले दिन से राही की सुरक्षा में एक गनर व तीन होमगार्ड तैनात हैं। उनकी सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। अगर जरूरत हुई तो सुरक्षा बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा।