उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्यों की विभागीय कार्यालय कक्ष में विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने वर्ष 2011 में घोषित बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण को दो वर्षों में पूरा करने का टास्क अधिकारियों को सौंपा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक जिले में तय समय-सीमा के अनुसार कार्य की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी प्रकार की गलती की शिकायत पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई होगी। जहां भी त्रुटि या अनावश्यक विलंब पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री ने दो टूक कहा कि सर्वे औपचारिकता नहीं, बल्कि सुधार का आधार बने।
आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जानकारी लिखित रूप में विभाग को दें। प्रधान सचिव सीके अनिल और सचिव जय सिंह ने वर्षों पूर्व हुए कैडेस्ट्रल एवं रिवीजनल सर्वे की जानकारी देते हुए नए सर्वे से होने वाले लाभों पर प्रकाश डाला। भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने कहा कि तकनीकी मार्गदर्शिका का समय पर निर्माण न होने से प्रारंभिक चरण में कार्य प्रभावित हुआ।
प्रथम चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों के 5657 राजस्व ग्रामों में ऑर्थोफोटोग्राफ, ग्रामस्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। किस्तवार कार्य 99.92 प्रतिशत, खानापुरी 94.4 प्रतिशत तथा प्रपत्र-6 का कार्य लगभग 79 प्रतिशत ग्रामों में पूर्ण है। 67 प्रतिशत ग्रामों में प्रारूप अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि 31 प्रतिशत ग्रामों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित हो चुके हैं।

