मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन के आवास विभाग ने डिफॉल्टर आवंटियों के मामलों को सुलझाने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके अनुसार, पहली बार ओटीएस में खरीदारों को दोहरा फायदा होगा। दंड ब्याज माफ करने के साथ ही एक महीने में मकान, प्लॉट का पूरा पैसा जमा करने वालों को तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
ओटीएस-2026 में सभी प्रकार की आवासीय सम्पत्तियां, सरकारी संस्थाओं को आवंटित भूखण्ड, स्कूल व चैरिटेबल संस्थाओं की सम्पत्तियां, नीलामी अथवा अन्य किसी भी पद्धति से आवंटित व्यवसायिक सम्पत्तियां, सहकारी आवास समितियों की सम्पत्तियां और मानचित्र डिफाल्टर भी शामिल किए गए हैं।
योजना के अनुसार, जो आवंटी निर्धारित तिथि के बाद 90 दिन तक किस्त या देय धनराशि जमा नहीं कर पाए, उन्हें भी डिफाल्टर माना जाएगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि डिफाल्टरों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा, वह भी उसी दर पर जो आवंटन के समय किस्तों पर लागू थी। किसी भी प्रकार का दंड ब्याज नहीं लगेगा।
ओटीएस के तहत आवंटी द्वारा जमा की गई राशि का समायोजन पहले डिफाल्ट अवधि के ब्याज में किया जाएगा, उसके बाद मूल धनराशि में। यदि पहले से जमा रकम ओटीएस गणना से अधिक निकलती है, तो वह वापस नहीं होगी। वहीं जिन मामलों में किस्तों का पुनर्निर्धारण किया गया है, वहां मूल आवंटन शर्तों के आधार पर ही ओटीएस की गणना की जाएगी।
शासनादेश जारी होने के बाद एक माह तक योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। डिफाल्टरों को ई-मेल, एसएमएस और पत्र से सूचना दी जाएगी। इसके बाद तीन माह तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। तय अवधि के बाद कोई आवेदन नहीं लिया जाएगा। आवेदन की सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के लिए www.awasbandhu.in पर लिंक और विशेष हेल्प डेस्क की व्यवस्था भी की जाएगी।
जो डिफाल्टर ओटीएस में आवेदन नहीं करेंगे या तय समय में भुगतान नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। वहीं आवेदन निस्तारण में अनावश्यक देरी पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर वित्तीय क्षति की वसूली भी की जाएगी। डिफाल्टर की संपत्तियां जब्त की जाएं।
उपाध्यक्ष एलडीए प्रथमेश कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री ने ओटीएस योजना को मंजूरी दे दी है। इसे बहुत जल्द लागू कर दिया जाएगा। आदेश जारी होते ही योजना शुरू हो जाएगी। इससे समय पर मकान की किस्त न जमा करने वाले प्रदेश के हजारों भवन भूखंड खरीददारों को फायदा होगा।

